Tuesday, July 19, 2011

तू है अफीम मेरी!



पल के लिए भी गुम नहीं
होती निगाहों से तस्वीर तेरी
न हो साथ तो जीता
हूँ यादों को तेरी
उन सवालों के जवाब देता हूँ
जो यूँ ही छूटे थे जुबाँ पर तेरी
अकेले में भी खिलखिलाता
हूँ, ठिठोली के साथ तेरी
जिस्म से खेलती है हवा
उँगली बन तेरी
रूह तक उतरी रहती
है साँसों की तपन तेरी
लटालूम फूलों में
देख लेता हूँ मुस्कान तेरी
जिंदगी की गहराई कुछ नहीं
सामने रहती है आँखें तेरी
कस्तूरी सी हरदम भरी रहती
है मुझमें ये नशीली महक तेरी
न होती है तू तो आईना भी
पूछता है-कहाँ है अफीम तेरी