Tuesday, April 5, 2011

गुम है चाँद!

गहरी स्याह रात
तन्हा-तन्हा सा आकाश
गुम है कहीं चाँद
अंदर स्याह विरानी
तन्हा-तन्हा सा दिल
गुम है कहीं चाँद
थमी हुई है पुरवाई
पेड़ों को भी है खबर
गुम है कहीं चाँद
थमी सी है जिंदगी
साँसों को भी है खबर
गुम है कहीं चाँद
दरिया भी खोज रहा अक्स
चोटियों को भी है तलाश
गुम है कहीं चाँद
नजरों को भी है खोज
रूह को भी यही तलाश
गुम है कहीं चाँद