Tuesday, November 8, 2011

कुछ तो है तुझमें ऐसा...



हर वक्त जलता हूँ
किसी शोले की तरह
तेरे आते ही अब्र बन जाता हूँ
कुछ तो ऐसा है तूझमें
कि तेरे छूते ही महक जाता हूँ
इन बोतलों में नहीं वो बात
तेरी नजरों से पीते ही बहक जाता हूँ
जब होती है मेरे आसपास तू
मैं खिला फूल नजर आता हूँ
जब लेता हूँ बाहों में तुझे
मैं कुबेर बन जाता हूँ
सपने में भी तुझे देख
सूरज से ज्यादा चमक जाता हूँ
जिस्म से भी परे है
अद् भुत अहसास तेरा
रूह में उतार तुझे
मैं खुद को खुदा पाता हूँ