Tuesday, January 10, 2012

दीप जलाएँ

एक दीप जलाया है अभी
थोड़ा ही सही
मिटा तो है अंधेरा
जानता हूँ
लौ मंद होते ही
फिर छा जाएगा सर्वत्र
मगर एक
कोशिश तो की है

एक दिन ऐसा भी आएगा
हर दिल जलाएगा दीप
फैलेगा उजियारा चहूँओर
कभी ना मिटने के लिए

तब हर दिन नई उमंग
नवसृजन आकार लेगा
उठो, आओ, मिलकर
सब दीप जलाएँ !