Thursday, June 9, 2011

बूँद-बूँद जिंदगी!



सुबह से ही
चू रहा है आसमान
बूँद-बूँद...
कशिश है कुछ
खिंचती-सी
होश अब हैं मदहोश
आँखों के रास्ते
दिल की खिड़की खोल
उतर गया मैं यूँ ही
बूँद-बूँद...
सफर का नशा
उस पर ये इश्क बेजुबाँ
डूब रहा हूँ अब मैं यूँ ही
बूँद-बूँद...
ऐसे डूबने का है बड़ा मजा
न जिये जाता है
न ही नसीब होती है मौत
जिंदगी को देख रहा हूँ मैं यूँ ही
बूँद-बूँद...





 

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