Monday, March 28, 2011

मेरे दिल की आवाज हो तुम!

तुम बताओ मैं कैसी हूँ
कई बार पूछती है वो
हर बार बताना चाहता हूँ
तुम एक दिलकश अहसास हो
बारिश की पहली बूँदों में
मिट्टी की नशीली खुशबू हो
रेगिस्तान की आग में
ठंडे पानी का सोता हो
दुनियावी चिंताओं के बीच में
मासूम बच्चे सी किलकारी हो
अमावस की अंध्ोरी रात में
पूनम सी शीतल चाँदनी हो
पथरीली-कंटीली राह में
घास की नर्म पगडंडी हो
झूठों की इस दुनिया में
एक नासमझ सच्चाई हो
भीषण सूखे के लंबे दौर में
पानी से भरी भटकी बदली हो
जिंदगी के दुखों में
खुशियों का इंद्रध्ानुष हो
तमाम चुनौतियों के बीच में
चट्टान का सीना चिर निकली कोपल हो
समुद्र की अथाह गहराई में
सीप से निकला मोती हो
थके मन-मस्तिष्क में
बहती मध्ाुर स्वर लहरी हो
भूखे भेड़ियों के जंगल में
प्यारी सी हिरणी हो
खून जमा देने वाली ठंड में
गुनगुनी अंगीठी हो
अब क्या-क्या बताऊँ तुम्हे
तुम फूलों की खुशबू हो
सुबह की पहली रश्मि हो
तेज उफनता झरना हो
मस्त पवन का झोंका हो
बया का प्यारा घोंसला हो
चूड़ियों की खनक हो
पायल की छम-छम हो
तुम अपना सा स्पर्श हो
अब तुम्हे मैं क्या कहूँ
तुम तो मेरे ही दिल की आवाज हो
तुम वो सारे अहसास हो
जो मै पल-पल जीता हूँ