Saturday, March 12, 2011

अहसान...


आजकल हम पर वह 'अहसान" करना भूल गई
पहले कई गुजारिश के बाद मिल लिया करती थी
कभी-कभी मुस्कराहट के फूल बिखेर दिया करती थी
बीमार होने पर हमारी खबर भी लिया करती थी
हमारे प्यार की गहराई जानने की कोशिश भी किया करती थी
हमसे दिन को भी रात बुलवाया करती थी
तारिफ सुनना हो तो चाय पर भी बुला लिया करती थी
झूठा ही सही प्यार निभाने का वादा भी कर दिया करती थी
फिर ऐसा क्या हुआ कि जो वह करती थी, अब नहीं करती
पता चला है आजकल उस पर कोई 'अहसान" करना भूल गया!