Tuesday, March 1, 2011

ये है प्यार के पैग-तू पीये जा और जिये जा

                                                                                                                                                                        लोग बोलते हैं केवल शराब ही वह नशा है जो आदमी को बाह्यमुखी (एक्सट्रोवर्ड) बनाता है। बाकि के तमाम नशे जैसे चरस, गाँजा, भाग, हेरोइन आदि अंतरमुखी (इंट्रोवर्ड) नशे हैं। इसलिए शराब के शौकिन आपको हर कहीं मिल जाएँगे, क्योंकि इसमें यह सहूलियत मिल जाती है कि दो पैग अंदर गए नहीं कि इंसान खुलने लगता है। दिल की बात जबाँ पर और जबाँ से जग जाहिर होते देर नहीं लगती। इसलिए कई अपराध्ाों का खुलासा तो शराब के नशे में बदमाश कर बैठते हैं। फिर भी लोग शराब पीते हैं और पीकर अंदर के राज उगल भी देते हैं। लोग यह भी जानते हैं और मानते हैं कि शराब पीकर बहुत कुछ ऐसा कह जाएँगे जो नहीं कहना चाहिए। ...लेकिन वे पीयेंगे और पीने के बाद जी भरकर राज उगलेंगे भी।
यह तो हुए शराब महिमा, लेकिन मेरे प्यारे दोस्तों इस नशे से भी कहीं-कहीं बढ़कर एक बहुत ही खतरनाक और एक्ट्रोवर्ड कर देने वाला नशा है। और इस नशे को दुनिया 'प्यार", 'इश्क", 'मोहब्बत" आदि नामों से जानती है। इस नशे में इंसान को कुछ बोलने की जरूरत नहीं होती, वह जहाँ जाता है कस्तूरी मृग की तहर महकता रहता है। जैसे कस्तूरी मृग को पता नहीं होता है कि कस्तूरी उसकी नाभि में है, वैसे ही प्यार में पगलाए व्यक्ति को भी नहीं पता होता कि वह महक रहा है। ...लेकिन वह महक रहा होता है। आपने कई बार और कई बार नहीं तो एक आध्ा बार यह तो सुना होगा कि फलाँ कि आँख में फलाँ के लिए प्यार नजर आता है या फलाँ व्यक्ति फलाँ के घर के चक्कर काट रहा है। जब फलाँ की बातें कोई और फलाँ को पता चल रही है, तो बताइये कहाँ छुप पाया प्यार! लोग अक्सर प्यार को दबाने, छिपाने की बातें करते हैं। वो भी उन लोगों के सामने जिनको कई बार तो वे जानते भी नहीं है। अजनबी व्यक्ति भी यदि प्यार करने वालों को देखता है, तो उनके हावभाव से वे गड़बड़ा जाते हैं। और यहीं वे पकड़े जाते हैं।
शराब की अति बुरी नहीं महा बुरी होती है। लेकिन प्यार की अति कभी बुरी नहीं होती और यह बुरी हो भी नहीं सकती। प्यार में तब्दील इंसान के जेहन में हमेशा अपना साथी इस कदर छाया रहता है कि चौबीसों घंटे वह उसी के साथ जीता है। इसके बावजूद भी इसे प्यार की अति नहीं माना जाता है, क्योंकि प्रेम में डूबे व्यक्तियों को यह भी अपर्याप्त लगता है। मजा तो इसमें ही है कि सारी चिंता, फिकर छोड़ प्यार के पैग पर पैग मारे जाओ और जिंदगी के मजे और रंग में एकाकार होते जाओ।