Saturday, July 6, 2013

तेरी हंसी

अरसा हो गया 
सुने हंसी तेरी
कि अब तो 
शिकायतों में है जिंदगी तमाम
रोशन करता हूं रोज
उम्मीद का दीया दिल में
शाम होते-होते 
उदासी में डूब जाता है कहीं
तुझे पता है
तेरी कुरबत की खातिर
हर पल मर कर 
न जाने कैसे जी उठता हूं मैं
फिर भी, नहीं होता है यकीं
तू भी वही, हूं मैं भी वही
न जाने कहां 
खो गए तू, मैं कहीं
ये तलाश, ये प्यास
तेरी एक हंसी से 
होती है शुरू
और, तमाम भी यहीं