Tuesday, April 10, 2012

मैं इंसान होता!

काश कि मैं
न मजदूर होता, न मालिक
न ग्राहक, न ही व्यापारी
दरोगा होता न चोर होता
न राजा, न प्रजा
रक्षक या भक्षक भी नहीं
क्या नेता, क्या मतदाता
अफसर, कर्मचारी भी नहीं
फिर भगवान, राक्षस भी क्यों
काश कि मैं
एक 'इंसान" होता
तब शायद
किसी आँख में न आँसू होता
न ही कहीं कोई भूखा सोता
काश
कि मैं इंसान होता