Thursday, February 9, 2012

काश!

कम्प्यूटर, फोन
सामने लगा पोस्टर
पेन, मोबाइल
कुर्सी, पानी की बोटल
यहाँ तक कि 'मैं" भी
सब, सबकुछ संवेदनशून्य
निराश, हताश
काश, तू छू दे
मुझे
तो 'सबमें" जान आ जाए