Friday, April 5, 2013

तोहमत...



तोहमत यह है मेरे सिर
साथ होकर भी कहां साथ होते हो
हर तरफ बिखरी है
महक तेरी
फिर भला कोई चाहकर भी
अकेला कैसे रहे
चाहता हूं 
छोड़ दे तू भी अब मुझे
आजमाऊं यह भी तो जरा
कब तलक बसी रहेगी 
सांसों में मेरी
तू जिंदगी की तरह
रोज सोचता हूं 
बताऊं तूझे 
तू दौड़ती है रगों में मेरी
खून की तरह 
पर, रोक लेता हूं 
तोहमत सुनने के लिए
ये ही तो बताती है 
'मैं" भी कहीं रहता हूं 
जिंदगी में तेरी
एक हमसाये की तरह