मुस्काते हुए खिलता है सूरज
बो देता है रश्मियाँ
ओंस की बूँदों में
ऐसे ही ये बदलियाँ
ध्ारती की कोख
कर देती है हरी
उन ठंडे झोकों की
तो बात ही न पूछो
जो करते हैं
पूरी कायनात की कानाफूसी
...और ये चाँद भी ना
अक्सर चाँदनी को भेज
करता है दिलों में ताकाझाँकी
कई बार तो तारों की बारात
झिलमिल करती
उतर आती है सपनों में
यकीनन, कुछ बात
तो है 'तुझमें"
न जाने क्यूँ
इक दर्द उठता है
बड़ी खामोशी से
डूबो देता है मुझे
गलने लगता है
मन-मस्तिष्क
ध्ाड़कनों की रफ्तार
हो जाती है मंद
क्यूँ कहती हो
अब जाना है मुझे
अब बताओ- इस दर्द
की दवा कहाँ से लाऊँ?
कई खुश ख्वाब
देते हैं दस्तक ख्वाब में
बुनते हैं अपनी
ख्वाबों की दुनिया
फिर जब सिरहाने
आ बैठती है प्यारी सी सुबह
ये हौले से आँखों के रास्ते
उतर आते हैं दिल में
फिर तेरा नाम लेकर
ध्ाड़कते रहते हैं हर पल
पूछती है जिंदगी मुझसे
तुम पाना चाहते हो जो
मिल गया वो तो क्या करोगे
अब उसे भला क्या बताऊँ
जब मैं पा चुका हूँ तुझे
फिर भला कुछ और
पाकर क्या करूँगा?
मुट्ठी खोली तो
हाथ कुछ न था
पर अंदर तक कुछ
गीला सा था
ये भी जानता था
कुछ नहीं मिलेगा
फिर भी उँगलियों को कर
सीलबंद, इतनी दूर चला
जहाँ खाली हाथ होने पर
भी यादों का सिलसिला मिला
मुझे नहीं पता
कल क्या होगा?
मिनट भर बाद की
तक नहीं कुछ खबर
बस जीता हूँ अभी में
और इस में ही
भरता हूँ रंग हर वक्त
कई बार मुझे भी घेरती
है 'कल" की चिंता
तब आँखें मूँदते ही
आज में खड़ी मिलती है 'तू"
पल के लिए भी गुम नहीं
होती निगाहों से तस्वीर तेरी
न हो साथ तो जीता
हूँ यादों को तेरी
उन सवालों के जवाब देता हूँ
जो यूँ ही छूटे थे जुबाँ पर तेरी
अकेले में भी खिलखिलाता
हूँ, ठिठोली के साथ तेरी
जिस्म से खेलती है हवा
उँगली बन तेरी
रूह तक उतरी रहती
है साँसों की तपन तेरी
लटालूम फूलों में
देख लेता हूँ मुस्कान तेरी
जिंदगी की गहराई कुछ नहीं
सामने रहती है आँखें तेरी
कस्तूरी सी हरदम भरी रहती
है मुझमें ये नशीली महक तेरी
न होती है तू तो आईना भी
पूछता है-कहाँ है अफीम तेरी