Monday, July 4, 2011
Sunday, July 3, 2011
मासूम ख्वाब!
सोने के बाद और
गहरी नींद के ठीक पहले
चादर से सरकते हुए
तकिये की झालर से
बालों की रहगुजर कर
आँखों में आ बसते हैं
अनगिनत मासूम ख्वाब
वहाँ नहीं होते
ध्ार्म, समाज, रिश्तों के बंध्ान
दुनिया से दूर इस दुनिया में
चलती है तो बस दिल की
देखता, सुनता, महसूसता
भी है तो बस दिल ही
और जब दिल की चलती है
तो पल में जी लेता हूँ जन्म-जन्मांतर
Saturday, July 2, 2011
इस बारिश...
सोचा था इस बारिश
इस कदर बरसोगे तुम
कभी रोपा था जो बीज
उसे अंकुरित कर दोगे तुम
बरसों-बरस का सूखा
इक पल में हर लोगे तुम
दिख रही हैं जो दरारें
सोता बन झरोगे तुम
बेजान हो चुके ठूँठ को
कोपलों से भर दोगे तुम
पथरीली इस नद में
उफान ला दोगे तुम
रोज... रोज...
घनघोर घटा बन छाते हो
फिर निराश, हताश छोड़
किसी और राह चले जाते हो
हर पल... हर क्षण...
चातक सम ताकता हूँ
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